
कमरे के अंदर की हवा भारी और गर्म हो चुकी थी। बेड की चादरें पूरी तरह से बिखर चुकी थीं। निध्यना बेड पर बिल्कुल बेपर्दा लेटी हुई थी, उसकी सांसें अभी भी पूरी तरह से नॉर्मल नहीं हुई थीं। उसकी पुसी से सर्वज्ञ का कम धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। सर्वज्ञ उसके बगल में अधलेटा था, उसका एक हाथ निध्यना की चिकनी कमर पर था और उसकी उंगलियां धीरे-धीरे नीचे सरकते हुए उसके गोल हिप्स को सहला रही थीं।
सर्वज्ञ की नज़रें निध्यना के पूरे बदन पर घूम रही थीं। उसके हैवी ब्रेस्ट जो तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, उसकी पतली कमर, और उसके उभरे हुए हिप्स। सर्वज्ञ का डिक, जो कुछ देर पहले शांत हुआ था, निध्यना के बदन की छुअन और उस नज़ारे को देखकर दोबारा से करवट लेने लगा था। उसकी हार्डनेस वापस लौट रही थी और वह फिर से पूरी तरह से टाइट होने लगा था।





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