
आर्या ने अपना बैग टेबल पर रखा और सात्विक की तरफ देखा। उसके चेहरे पर हल्की सी चिंता थी जो दिन भर के हंगामे के बाद अब थोड़ी कम हुई थी।
आर्या ने अपनी जगह से उठते हुए कहा, काफी लंबा दिन रहा। तुम लोग फ्रेश हो जाओ, मैं किचन में जाती हूँ। कुछ हल्का सा खाने के लिए बना लेती हूँ, भूख सबको लगी होगी।

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